Saturday, 26 May 2012

सिंधिया ने गरमाई मध्‍यप्रदेश की कांग्रेस राजनीति

''अभी तो मंजिल पर नजर''
         यूं तो केंद्रीय वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्री ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया अभी तक मप्र की राजनीति में अधिक दिलचस्‍पी नहीं ले रहे थे, उनका राजनीतिक लक्ष्‍य ग्‍वालियर, चंबल संभाग तक सीमित था, लेकिन पिछले चार-पांच महीनों में अचानक सिंधिया ने प्रदेश की राजनीति में अपने कदम बढ़ाएं हैं। ऐसा नहीं है कि वे इससे पहले सक्रिय नहीं थे, लेकिन उनकी यात्राओं ने राजनीति में भूचाल ला दिया है और उनके एक बयान ने तो कांग्रेस शिविर में हल-चल ही मचा दी है। वे लगातार कह रहे हैं कि मप्र कांग्रेस के अध्‍यक्ष भूरिया ही कांग्रेस का चेहरा है और अगर कोई आदिवासी मुख्‍यमंत्री बनता है, तो यह मप्र के लिए गौरव की बात होगी। सिंधिया के इस बयान से दि‍ग्विजय सिंह खेमा खफा हुआ है। विशेषकर दिग्विजय समर्थक नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह की राह में कहीं न कहीं यह बयान बाधा बनकर खड़ा हो गया है। दिलचस्‍प यह है कि इस बयान पर पूर्व मुख्‍यमंत्री दिग्विजय सिंह ने संतुलित टिप्‍पणी करके यह कह दिया है कि मुख्‍यमंत्री का चयन तो विधायक करेंगे। इसके बाद भी सिंधिया लगातार भूरिया को ही मुख्‍यमंत्री पद का दावेदार बता रहे हैं। सिंधिया ने थोड़े समय में ही 40 जिलों के दौरे कर लिये हैं और वे लगातार अपने दौरों के जरिए कांग्रेस को मजबूत करने का काम भी कर रहे हैं। इन दिनों मप्र में एक नया ध्रुवीकरण पैदा हो रहा है जिसकी बागडोर सिंधिया के हाथों में धीरे-धीरे आ रही है जिसमें सत्‍यव्रत चतुर्वेदी, सुरेश पचौरी, अरूण यादव शामिल हैं। सिंधिया की राजनीति गतिविधियों से मप्र की राजनीति में अच्‍छी खासी हलचल पैदा हो गई है। सिंधिया 25 मई को राजधानी में थे, उन्‍होंने फिर से मुख्‍यमंत्री पद के लिए भूरिया को ही बेहतर उम्‍मीदार बताया। इससे साफ जाहिर है कि भविष्‍य में सिंधिया भूरिया पर ही दांव खेलेंगे।
''मोबाइल पर बात करते हुए ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया''

बेटियों की तस्‍करी मध्‍यप्रदेश में


        जहां एक ओर मध्‍यप्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान बेटी बचाओ अभियान चलाये हुए हैं। इसके प्रचार अभियान पर करोड़ों रूपया खर्च हो रहा है। वहीं शर्मनाक स्थिति यह है कि मप्र के कई जिलों से बेटियों की तस्‍करी हो रही है और पुलिस मूकदर्शक बनी बैठी है। मानव तस्‍करी का एक गिरोह कई हिस्‍सों में विभिन्‍न रूपों में सक्रिय है, जो कि बेटियों को निशाना बना रहे हैं। विशेषकर आदिवासी अंचलों से बेटियों के गायब होने की सबसे अधिक सूचनाएं सामने आ रही हैं। राजधानी से सटे आदिवासी बाहुल्‍य जिले बैतूल में तो पिछले पांच सालों में 1560 बालिग और नाबालिग लड़कियां लापता हुई हैं। इसके बाद भी डिंडोरी, अनूपपुर, शहडोल जिलों से भी लड़कियों के गायब होने की सूचनाएं हैं। 
बांछड़ा समुदाय में सबसे अधिक खरीद-फरोख्‍त :
         मध्‍यप्रदेश में परंपरा की आड़ में चल रहे बांछड़ा समुदाय के देह व्‍यापार डेरों में भी मानव तस्‍करी के जरिए अबोध बालिकाओं की खरीद फरोख्‍त का भी सिलसिला चल रहा है। बांछड़ा जाति नीमच, रतलाम, मंदसौर के इलाकों में फैली हुई है। वर्ष 2011 में तो एक गिरोह पकड़ा गया था, जिसमें से 06-07 बालिकाओं को वैश्‍यावृत्ति करने से मुक्ति किया गया था। राज्‍य में युवतियों के गायब होने के मामले वर्ष 2000 से बढ़ते ही जा रहे हैं। नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्‍यूरो के रिकार्ड देखें तो चौंकाने वाली तस्‍वीर सामने आ रही हैं जिसमें हर साल लड़किया गायब हो रही हैं अथवा उन्‍हें वैश्‍यावृत्ति के लिए प्रेरित किया जा रहा है। वर्ष 2010 में खरीद-फरोख्‍त के 07 मामले दर्ज हुए जिसमें इंदौर में 02, रीवा, पन्‍ना, दतिया, गुना और टीकमगढ़ में 01-01 मामला था। वर्ष 2009 युवतियों के खरीद-फरोख्‍त के 09 मामले सामने आये जिसमें ग्‍वालियर और हरदा में 02-02 और मुरैना में 03 एवं जबलपुर, डिंडोरी में 01-01 मामला सामने आये। प्रदेश में सबसे ज्‍यादा खरीद-फरोख्‍त के मामले नीमच और मंदसौर से आ रहे हैं। यहां से लड़कियों को महानगरों में बेचा जा रहा है, तो कुछ लड़कियों को तो अरब देशों में बेचा गया है। सामान्‍यत: बालिकाओं के अपहरण, खरीद-फरोख्‍त, दलाली और मानव तस्‍करी के यह मामले समय-समय पर उजागर होते रहते हैं इसके बाद भी पुलिस का कोई ध्‍यान इस ओर नहीं है। बैतूल जिले में लड़कियों की गुमशुदगी के मामले चौंकाने वाले हैं। पिछले पांच सालों में इस जिले से लड़किया अचानक गायब हो रही है। पहले लड़कियां 50 से 60 हजार रूपये में खरीद कर शादी कर ली जाती थी और फिर उन्‍ासे देह व्‍यापार करवाया जाता था। इसमें सबसे ज्‍यादा बालिक और नाबालिक लड़कियों को देह व्‍यापार में उतारा जा रहा है। इस जिले के एसपी ललित शाक्‍यवार का कहना है कि मानव तस्‍करी रोकने के लिए हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं। इन मामलों को लेकर पुलिस अधिकारी और सरकार गंभीर नहीं है। यही वजह है कि पुलिस ऐसे गिरोह पर नजर तक नहीं डाल पाती है और मानव तस्‍करी करने वाला गिरोह अपनी दुनिया में मस्‍त रहता है।

Friday, 25 May 2012

आग बरसा रहा है सूरज, राहत के लिए हुए लोग बैचेन मध्‍यप्रदेश में

हाय गर्मी, कैसे बचे

कुछ पल गर्मी से राहत का आनंद लिया जाये
इन दिनों मध्‍यप्रदेश का मौसम बदला-बदला है। सूरज का क्रोध आग उगल रहा है। हर तरफ गर्मी कहर बनकर बरप रही है, लोग राहत के लिए बैचेन हैं। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी गर्मी ने सारे रिकार्ड तोड़ दिये हैं। दिन में सड़के सुनसान हो जाती है, जो लोग सड़कों पर दौड़ते नजर आते हैं, वे भी मजबूरी में सिर से पांव तक कपड़ों में ढके होते हैं। सूरज की इस तल्‍खी ने लोगों की दिनचर्या बदलकर रख दी है। मौसम विभाग बार-बार कह रहा है कि फिलहाल तो राहत की कोई उम्‍मीद नहीं है, लेकिन आधुनिक ज्‍योतिषों का आकलन है कि इस बार नौ-तपे में बारिश होगी। फिलहाल तो गर्मी की तपन तम-तमा रही है। गर्मी से राहत के लिए लोगों ने अलग-अलग अपने इंतजाम किये हुए हैं। मप्र के बुरहानपुर जिले में तो तापमान ने छलांग लगाते हुए 46 डिग्री पर कर गया। जबकि भोपाल का तापमान 43.9 डिग्री रहा है। मौसम के निदेशक डॉ0 डीपी दुबे का मानना है कि 22 मई 1947 को तापमान 45.6 दर्ज किया गया था, जबकि इसी तारीख में वर्ष 2011 में भोपाल का तापमान 41.1 डिग्री सेल्सियस आका गया था, जबकि वर्ष 2010 में तो तापमान 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। मौसम का चक्र यूं ही चलता रहता है। कभी तापमान बढ़ता है, तो कभी तापमान घटता है। 
सूरज की तपन से सड़कें हुई सुनसान
          तम-तमाई गर्मी ने लोगों को परेशान किया हुआ है। प्रदेश के कई हिस्‍सों में दिनभर सड़के सुनसान रहती हैं। लगातार ऊपर चढ़ते पारे और आसमान से बरसती आग सामान्‍य जनजीवन को प्रभावित किया है। इसके चलते बाजार का व्‍यवसाय तो प्रभावित हुआ ही है पर साथ ही साथ सड़कों पर जो लोग निकलते हैं उन्‍हें कई प्रकार की सावधानियों के साथ निकलना पड़ रहा है। अब तो घर और दफ्तरों में चल रहे कूलर और एसी भी गर्म हवाएं फैंकने लगे हैं। यही हाल रात्रि में भी बना रहता है। देर रात्रि तक गर्म हवाओं का सिलसिला चलता रहता है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार एक जून को बारिश दस्‍तक दे देगी। गर्मी की तपन से सबसे ज्‍यादा प्रभाव युवतियों को हो रहा है, जो कि अपने आपको बचाने के लिए पूरी तरह से कपड़ा ढक कर सड़क पर निकल रही हैं। वहीं राज्‍य के हर हिस्‍से में तालाब और झीलों में अचानक चहल-पहल बढ़ गई है। मौसम की इस बदली फिजा ने पूरी तरह से मप्र को अपनी बाहों में जकड़ लिया है।
भोपाल की झील में गर्मी से राहत के लिए वोटिंग का इंतजार
कहीं तो राहत नसीब हो






Thursday, 24 May 2012

रसोई घर में दफन पति की लाश पर कल्‍युगी पत्‍नी सैंक रही थी रोटियां

          क्‍या कोई विश्‍वास करेगा कि जिस जीवनसंघनी के साथ सात फेरे लेकर जीवन-मरने की कसम खाई थी, उसी पत्‍नी ने अपने पति को प्रेमी की खातिर न सिर्फ घर के किचिन में जहर देकर पहले मारा और वहीं पर ही दफन कर डाला। हद तो तब हो गई जब इस कल्‍युगी पत्‍नी ने दो दिनों तक लगातार दफन पति की लाश पर गैस रखकर रोटियां भी सैंकी। भला हो आस-पड़ौस का कि उन्‍होंने रहस्‍य पर से पर्दा हटाया और पुलिस ने पत्‍नी को अंतत: पकड़ ही लिया। यह घटना क्रम मप्र के विदिशा जिले के गंजबासौदा से 10 किमी दूर ग्राम जरौद का है। ऐसा नहीं है कि यह कोई पहली घटना है कि प्रेमी की खातिर पत्‍नी ने पति को मार डाला। राज्‍य में ऐसी घटनाएं हर महीने हो रही हैं। इसके पीछे पत्‍नी का प्रेमी के प्रति गहरा लगाव और आर्थिक संकट एक बड़ा कारण सामने आ रहा है। 
महिला के विभिन्‍न रूप : 
       वर्षों से कहा जा रहा है कि महिलाओं को समझना मुश्किल है। कलयुग में भी महिलाएं अपना चरित्र दिखाने में पीछे नहीं हैं। अभी हाल ही में भोपाल शहर में पत्‍नी ने प्रेमी के साथ मिलकर पति की सिर कुचल कर निर्मम हत्‍या कर दी थी। ऐसी घटनाएं नित-प्रति सामने आती है, लेकिन अगर ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी घटनाओं का खुलासा होने लगे तो फिर पूरी पारिवारिक व्‍यवस्‍था ध्‍वस्‍त होने की कगार पर पहुंचने के संकेत मिलते हैं। कोई 200-300 आबादी वाले गांव जरौद में मीना बाई दांगी अपने पति के साथ जीवनभर साथ निभाने का वादा करके विवाह सूत्र में बंधी थी और इस अटूट बंधन का ही परिणाम था कि दो बच्‍चों की मां बनी, बस बाप का कसूर यह था कि वह परिवार को चलाने के लिए चाय की दुकान चलाकर घर परिवार का गुजर-बसर कर रहा था पर उसे क्‍या पता था कि उसकी पत्‍नी उसके साथ न सिर्फ बेईमानी कर रही है, बल्कि परिवार को ही तहस-नहस करने पर तुली हुई है। पहले पत्‍नी ने अपने बड़े बेटे को प्रेमी के साथ देखने पर रहस्‍यमय ढंग से मार डाला और जब यह बात पति को पता चली तो मीना ने उसे भी जहर देकर अपने पति मुन्‍ना लाल दांगी को घर में ही किचिन में दफना दिया। यह महिला न तो डरी और न ही सहमी, बल्कि उसने अपने पति की लाश को दफनाने के बाद घर में इस तरह से लीपा-पोती कर दी थी कि किसी को एहसास नहीं हुआ कि घर में अपने पति को ही दफना दिया। इसके बाद भी उसके छोटे भाई और पुत्र को अपने पिता के गायब होने का संदेह हुआ, दोनों पुलिस चौकी पहुंचे और इन्‍होंने मां और भाभी पर गायब होने का संदेह जाहिर किया। पुलिस आई और पत्‍नी मीना बाई से पूछताछ शुरू हुई। पूछताछ के दौरान ही उसने स्‍वीकार कर लिया कि उसने पति को मार डाला है। इसके बाद तो गांव-गांव में हलचल मच गई। हर आदमी कल्‍युगी पत्‍नी को देखने के लिए उमड़ पड़ा। दुर्भाग्‍य पूर्ण स्थिति यह है कि इस कल्‍युगी पत्‍नी ने दो दिनों तक अपने पति की लाश पर रोटियां भी सैंकी। इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि उसका पति के प्रति किस कदर नराजगी थी और प्रेमी के प्रति किस कदर लगाव था। प्रेम की खातिर पूरा परिवार उजड़ गया। 

Wednesday, 23 May 2012

जिद और जुनून ने बनाई राह आसान, सिमाला बनी आईपीएस

    जिद और जुनून अगर किसी भी लक्ष्‍य के लिए कर लिया जाये, तो फिर उसे पाना कोई बड़ी कठिन राह नहीं होती है। यही रास्‍ता सिमाला प्रसाद ने भी चुना। रात-दिन की मेहनत और लगातार किताबों की जिंदगी में डूबे रहने से अंतत: आईपीएस बन ही गई। यह मध्‍यप्रदेश के लिए गौरव की बात है कि इस सरजमी की बच्‍ची ने अपने दम-खम पर आईपीएस पाई है। सिमाला ने आईपीएस की राह तक पहुंचने के लिए किसी भी कोचिंग संस्‍थान का सहारा नहीं लिया, बल्कि सेल्‍फ स्‍टडी को सफलता की सीढ़ी माना। भोपाल के बरकतउल्‍ला यूनिवर्सिटी से उन्‍हें सोशियोलॉजी में पीजी के दौरान गोल्‍ड मैडल भी मिला था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा सेंट जोसफ कोएड स्‍कूल ईदगाह हिल्‍स में हुई उसके बाद स्‍टूडेंट फॉर एक्‍सीलेंस से बीकॉम एवं बीयू से पीजी करने के बाद पुलिस अधिकारी बनने का सपना देखा और इसकी शुरूआत पीएससी की परीक्षा से की। संयोग देखिए कि पहली परीक्षा में ही पीएससी में सिलेक्‍ट हो गई और उनकी पहली नियुक्ति डीएसपी के रूप में हुई। सिमाला को सबसे पहले रतलाम में सीएसपी बनाया गया। यहां पर बड़े अफसरों ने उनकी घोर उपेक्षा की तथा कई बार अपमानित किया। इससे दुखी होकर सिमाला ने एक दिन तय किया कि वे अब आईपीएस बनेगी। रात-दिन नौकरी करते हुए अपनी शिक्षा-दीक्षा को बढ़ाते हुए सिमाला ने सिविल सर्विसेस की तैयारी शुरू की और वर्ष 2011 में उनका आईपीएस में चयन हो गया और अब वे हैदराबाद स्थित इंडियन पुलिस सर्विस अकादमी में ट्रेनिंग ले रही है। सिमाला के माता-पिता भोपाल में हैं। मां जानी-मानी लेखिका पदमश्री मेहरूनिशा परवेज है, तो पिता पूर्व आईएएस अधिकारी भागीरथ प्रसाद हैं। सिमाला की कामयाबी का राज उनके माता-पिता नहीं बल्कि उनकी अपनी शिक्षा-दीक्षा के प्रति जुनून और जज्‍वा है। हर आईएएस पिता की इच्‍छा होती है कि उसका पुत्र भी आईएएस बने, लेकिन ऐसा होता नहीं है फिर भी पूर्व आईएएस भागीरथ प्रसाद की बेटी सिमाला प्रसाद ने वह करिश्‍मा कर दिखाया है, जो कम ही बच्चियां कर पाती है। 
                                   ''जय हो मप्र की''

86 साल बाद मप्र की 23 लोकभाषाओं का सर्वे

हर हाल में परंपरा को बनाये रखने की जिद कायम
        लोकभाषाओं का अस्तित्‍व लगातार समाप्‍त हो रहा है। मप्र में तो लोकभाषाएं अंतिम सांसे गिन रही है। अंग्रेजी और हिन्‍दी ने इन लोकभाषाओं को मटिया-मेट करने में कोई कौर-कसर नहीं छोड़ी है। इसके बाद भी लोकभाषाओं को बचाने के लिए कई स्‍तरों पर काम हो रहा है। राज्‍य में आदिवासी लोक कला परिषद ने प्रदेश की विभिन्‍न आदिवासियों की भाषा, रहन-सहन, गीत, कथाओं और जीवन शैली पर काम किया है। यहां तक कि राज्‍य की लोकभाषाओं के गीतों का बॉलीबुड में भी उपयोग हुआ है। अब 86 साल बाद लोकभाषाओं को सहेजने और उनके विकास के लिए केंद्र सरकार की पहल पर गुजरात की भाषा शोध एवं प्रकाशन संस्‍थान बड़ोदा ने लोकभाषाओं को बचाने का अभियान छेड़ा है। इसके तहत मध्‍यप्रदेश की 23 भाषा और बोलियों का सर्वेक्षण किया जा चुका है तथा वर्तमान में एक दर्जन भाषाओं के सर्वे पर काम किया जा रहा है। इसके पीछे का मकसद यह है कि लोग भाषाओं में बच्‍चों को उन्‍हीं की भाषा में प्राइमरी स्‍तर पर पढ़ाई कराना है। 
हमें कोई देख न ले
          लोकभाषाओं के सर्वे के दौरान आदिवासियों के गीत, कथाएं, जीवन शैली, रंगों, संबंधों, जगह-स्‍थान तथा समय के साथ-साथ इतिहास, भूगोल को ध्‍यान में रखकर भाषाओं के अस्तित्‍व की सच्‍चाई का पता लगाया जा रहा है। मध्‍यप्रदेश में यह काम 50 लोगों की टीम कर रही है। अभी तक इस टीम ने 23 भाषाओं का सर्वे पूरा कर लिया है। जिन भाषाओं का सर्वे पूरा हो गया है उनमें बघेली, भिलाली, गौंड़ी, जादौ, माटी, बंजारी, भदावरी, भीली, ब्रज, बुंदेली, मालवी, नहाल, निमाड़ी, पंचमहली, पवारी, रजपूती, सहरयायी, सिकरवारी, कछवाहघारी, तोरधारी, जटवारी, कोरवी, कोरकू, लोधधारी जैसी भाषाओं का सर्वे पूरा हो चुका है, जबकि हलवी, कोल, खेरा, वेगानी, कंजर, मवासी, वडडर, पाली, लोधी के सर्वेक्षण का काम शुरू किया जा रहा है। दिलचस्‍प यह है कि लंबे समय बाद मप्र की लोकभाषाओं के सर्वे का कार्य हो रहा है। राज्‍य में भी कई स्‍तरों पर बोलियों को लेकर कार्य हुए हैं, लेकिन जिस तरह से सर्वे अब हो रहा है वैसा काम अभी तक नहीं हुआ है।

Tuesday, 22 May 2012

गांव-गांव में पानी की मारा-मारी और अब सरकार बनायेगी मप्र में जल निगम


       भले ही गांव-गांव में एक-एक बूंद पानी के लिए ग्रामीणजनों को 2 से 5 किलोमीटर दूर तक भटकना पड़ रहा है फिर भी पानी नसीब नहीं हो रहा है। यह तस्‍वीर मप्र की कई हिस्‍सों में बनी हुई है, जहां पर ग्रामीण क्षेत्रों में पानी का संकट लगातार गहरा रहा है। गर्मी के मौसम में तो ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं लंबी दूरी का सफर करने के बाद पानी ला पाती हैं। पानी के स्‍थाई स्‍त्रोत सूख रहे हैं और जो व्‍यवस्‍था पीएचई विभाग ने तैयार की है वह फ्लॉप साबित हुई है। 
अब मप्र की भाजपा सरकार ने 22 मई को मंत्रि परिषद की बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों में नये पेयजल स्‍त्रोत तलाशने, पेयजल सप्‍लाई और नल-जल योजना चलाने के लिए मप्र जल निगम गठित करने का फैसला लिया है। यह निगम लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी विभाग के अधीन काम करेगा। यूं तो मप्र में कोई तीन दर्जन से अधिक कार्पोरेशन काम कर रहे है जिसमें से अच्‍छे काम करने वाली की संख्‍या बमुश्किल आधा दर्जन भी नहीं है। ऐसी स्थिति में एक नये निगम का गठन करने का क्‍या मतलब है यह समझ से परे है। 

          मप्र में वर्ष 1993 से 2002 के बीच कांग्रेस सरकार ने पंचायतीराज के चलते ग्रामीण क्षेत्र की पेयजल व्‍यवस्‍था लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी विभाग से लेकर पंचायत विभाग को सौंप दी थी। तब से अब तक यही व्‍यवस्‍था कायम है। इसके चलते गांव-गांव में पीएचई का आधार-भूत ढांचा पूरी तरह से खत्‍म हो गया है और नलजल योजनाएं पंचायत के हवाले हैं। वर्तमान में केंद्र सरकार का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति व्‍यक्ति को हर दिन  40 लीटर पानी मिलना चाहिए, लेकिन दस लीटर पानी भी लोगों को नसीब नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्‍थायी पानी के स्‍त्रोत कुएं, बाबड़ी, झील एवं नदियां सूख रही है इनकी तरफ किसी का ध्‍यान नहीं है। वहीं प्रदेश में 4,77,162 हैण्‍डपंप स्‍थापित है जिसमें से 17,564 हैण्‍डपंप बंद पड़े हैं। इनमें से अधिकतर हैण्‍डपंप ग्रामीण क्षेत्रों के हैं। वैसे तो ग्रामीण नलजल योजना काम कर रही है, लेकिन इसके परिणाम कोई खास नहीं मिले हैं। इससे साफ जाहिर है कि नये निगम के गठन से ग्रामीण क्षेत्र की समस्‍या हल होने वाली नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाली एजेंसियों में एक और कार्पोरेशन शामिल हो जायेगा। 
                              ''जय हो मप्र की'' 

Monday, 21 May 2012

कांग्रेस की राजनीति में मील का पत्‍थर साबित होगी जनचेतना यात्रा

लो मैं आ गया : अब बताओं सरकार कैसे परेशान कर रही है।
           राजनीति  की धारा में बहना हर किसी राजनेता के बस की बात नहीं होती है। कदम-कदम पर षड़यंत्र और पर्दे के पीछे फ्लॉप करने की रणनीति हर राजनेता को तोड़ती है । इसके बाद भी राजनेताओं का जज्‍वां ही कहा जायेगा कि वह अपनी धारा को प्रवाहमान बनाने के लिए निकल पड़ते हैं। फिर न उन्‍हें अपने विरोधियों की चिंता सताती है और न ही षड़यंत्रों की परवाह होती है। उनका मकसद सिर्फ जनता के बीच जाकर अपनी बात कहना है। इन्‍हीं राह पर इन दिनों मध्‍यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह 'राहुल' चल रहे हैं। उनकी जनचेतना यात्रा का एक पड़ाव बुंदेलखंड में पूरा हो गया है। यह यात्रा 135 घंटों में 1430 किमी चली है जिसमें बुंदेलखंड का चप्‍पा-चप्‍पा जाना और समझा है। इस दौरान सिंह को बेहाल किसान मिले, उनकी पीड़ाएं पता लगी, दर-दर भटक रहा किसान अपनी व्‍यथा बताने से नहीं रूके इसके साथ ही योजनाओं में चल रहे भ्रष्‍टाचार के प्रमाण भी मिले। यात्रा के दौरान सिंह ने भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर जनता की सभा में ललकारा भी। उन्‍होंने न सिर्फ मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर तीखे प्रहार किये, बल्कि सरकार की कलई भी खोली। जनचेतना यात्रा के 9 दिनों में बुंदेलखंड की 21 विधानसभा सीटों में 250 सभाएं ली इस यात्रा का समापन 19 मई, 2012 को बीना में हुआ। इस मौके पर सिंह ने खुलासा किया कि उन्‍होंने नवंबर 2011 में यह तय कर लिया था कि वे यात्रा पर जायेंगे और जनता को सरकार की कार-गुजारियों से अवगत करायेंगे। इसके पीछे का तर्क यह है कि जब उन्‍होंने अविश्‍वास प्रस्‍ताव विधानसभा में प्रस्‍तुत किया था तब सरकार ने उनके आरोपों पर कोई सार्थक जबाव नहीं दिया था, तब सिंह ने मान लिया था कि यह सरकार कोई भी तर्क-कुतर्क कर सकती है, लेकिन सार्थक जबाव नहीं दे सकती है और इसका सही माध्‍यम जनता ही है। इस यात्रा से कांग्रेस को नई ऊर्जा मिली है और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने का अवसर भी मिला। 
इतिहास बना रहे हैं : 
''हर व्‍यक्ति का दर्द मेरा दर्द है''
      यूं तो नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह के बारे में आमधारणा  है कि वे सुख सुविधाओं की राजनीति करते हैं और चैम्‍बर से बाहर निकलने में उन्‍हें पीड़ाएं होती है पर इस मिथक को सिंह ने वर्ष 2012 मई महीने में तोड़ ही दिया। जब पूरा प्रदेश गर्मी की तपन से परेशान है तब तपती धूप में सिंह अपनी यात्रा पर निकल पड़े हैं न उन्‍हें धूप परेशान कर रही है और न ही एसी की जरूरत है, बल्कि  उमड़ते जनता का प्‍यार चाहिए अपनी यात्रा का दूसरा पड़ाव भी 23 मई से फिर नीमच से शुरू करेंगे, जो कि 25 मई को जाबरा में समाप्‍त होगा। इस यात्रा से नेता प्रतिपक्ष का राजनैतिक ग्राफ निश्चित रूप से बढ़ा है और वे कांग्रेस की राजनीति में एक चमकते सितारे बनकर उभर रहे हैं। निश्चित रूप से जनचेतना यात्रा मप्र की कांग्रेस राजनीति में मील का पत्‍थर साबित होगी। यात्रा के पहले पड़ाव में बुंदेलखंड पैकेज का मामला उन्‍होंने जोर-शोर से उठाया और इस बात को प्रमाणित करने का प्रयास किया कि बुंदेलखंड पैकेज की राशि भ्रष्‍टाचार की भेंट चढ़ गया। केंद्र सरकार ने चार हजार करोड़ की राशि बुंदेलखंड पैकेज के रूप में दी थी, लेकिन यह राशि भ्रष्‍टाचार की भेंट चढ़ गई और पूरे बुंदेलखंड में मंत्रियों के नाते-रिश्‍तेदार ठेकेदार बन गये हैं। यह सच है कि बुंदेलखंड से कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी का खासा प्रेम है और श्री गांधी बार-बार उन इलाकों में पहुंच भी रहे हैं। जनचेतना यात्रा फिलहाल कुछ दिनों के लिए रूक सकती है, लेकिन यह यात्रा आगामी विधानसभा चुनाव तक चलती रहेगी। ऐसा संकल्‍प नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ले चुके हैं फिर भले ही कितनी ही बाधाएं आये, लेकिन वे रूकेंगे नहीं।





Wednesday, 25 April 2012

फिर केंद्र सरकार को ललकारा शिवराज ने

        मध्‍यप्रदेश के विकास में जब-जब केंद्र सरकार बाधा बनकर खड़ी होती है, तो राज्‍य के मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को बेचैनी होने लगती है। फिर वे गांधीवादी रास्‍ता अपनाने लगते हैं। मप्र के मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने केंद्र सरकार के खिलाफ आंदोलन करने का फैसला पहली बार नहीं किया इससे पहले भी दो बार अनशन कर चुके हैं और एक बार पूरी कैबिनेट के साथ दिल्‍ली में प्रदर्शन भी किया जा चुका है। अब इस बार गेहूं के लिए बारदाने नहीं मिलने के कारण संसद भवन में गांधी जी की प्रतिमा के सामने धरने पर बैठने का एलान किया है। निश्चित रूप से मप्र में इस बार समर्थन मूल्‍य पर गेहूं खरीदी में फिर रिकार्ड टूटने का संकेत मिल रहा है। शुरूआती दौर में सरकार ने 55 लाख मीट्रिक टन गेहूं का लक्ष्‍य रखा था, लेकिन जिस तरह से मंडियों में गेहूं की आवक बढ़ी है उससे लगता है कि सरकार 65 लाख मीट्रिक टन तक गेहूं खरीद सकती है। अपार गेहूं खरीदी के बाद सरकार को बारदाने की सख्‍त जरूरत पड़ती है। इसबार प्रदेश की सरकार ने न सिर्फ गेहूं खरीदी का लक्ष्‍य बढ़ाया, बल्कि गेहूं के भंडारण की पुख्‍ता व्‍यवस्‍था भी की है। बारदाने के लिए केंद्र सरकार को 565 करोड़ एडवांस दिये जा चुके हैं, लेकिन केंद्र सरकार ने 37 लाख बारदाने अभी तक नहीं दिये हैं। मात्र 43 बोरे ही मिल पाये हैं। निश्चित रूप से अगर बोरे नहीं मिलेगे, तो गेहूं गोदाम तक कैसे पहुंचेगा यह एक बड़ी समस्‍या खड़ी हो गई है। मप्र उन बिरले राज्‍यों में शुमार हो गया है, जहां पर गेहूं का उत्‍पादन रिकार्ड तोड़ रहा है। अब तो राज्‍य गेहूं खरीदी में भी हरियाणा, गुजरात, राजस्‍थान से आगे निकल गया है। यह एक शुभ संकेत है कि किसानों की मेहनत रंग ला रही है। मुख्‍यमंत्री एक बार फिर किसानों के मुद्दों को लेकर मैदान में उतर आये हैं। 

Monday, 23 April 2012

कहां तलाश करें बहुएं मध्‍यप्रदेश में

जीवन भर साथ निभाना
     सामाजिक तानाबाना तेजी से छिन्‍न-भिन्‍न हो रहा है, लोगों का नजरिया संकुचित हो रहा है, जिसका परिणाम परिवारों पर दिख रहा है। आलम यह हो गया है कि अब शादी के लिए बहुएं तलाश करने में लोगों को पसीना आ रहा है। इसकी वजह है लिंगानुपात में जमीन-आसमान का अंतर। इस समस्‍या से देश के कई राज्‍य जूझ रहे हैं और अब मप्र भी इसमें शामिल हो गया है। राज्‍य की भाजपा सरकार ने तो बेटी बचाओ अभियान छेड़ रखा है। राज्‍य के कई हिस्‍सों में लिंगानुपात में बड़ा अंतर है जिसके चलते लोगों को अपने घरों में बहुएं लाने के लिए पड़ौसी राज्‍यों की शरण लेनी पड़ रही है। यहां तक कि बहुएं खरीदकर लाई जा रही हैं। गरीब राज्‍य मप्र में शादियां आज भी समाज के सम्‍मेलनों के जरिए व्‍यापक स्‍तर पर होती है, क्‍योंकि कई परिवार तो शादियां करने की स्थिति में नहीं होते हैं। इसलिए उन्‍हें समाज का मंच स्‍वीकार करना पड़ता है। इस दिशा में भी राज्‍य सरकार ने भी कन्‍यादान जैसी महती योजना शुरू की है जिसके बेहतर परिणाम मिले हैं। इस योजना से अब तक गरीब दो लाख निर्धन कन्‍याओं के जीवन में सुहाग की लकीर खिच गई है। सरकार भी विवाह और ग्रहस्‍थी की शुरूआत के लिए 15 हजार रूपये मुहैया करा रही है। वैसे तो इस योजना का कई स्‍तरों पर विरोध भी हुआ है, लेकिन इसका समर्थन बहुत अधिक है। समाज का एक बड़ा तबका इस योजना के साथ खड़ा है, क्‍योंकि गरीब कन्‍याओं के विवाह के रास्‍ते सरकार ने खोल दिये है। मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस योजना के जरिए अपने आपको गरीबों का मसीहा भी साबित करने की कोशिश की है। 
परिचय सम्‍मेलन और शादियां :
आओ साथ रहे
       मध्‍यप्रदेश में दुल्‍हा-दुल्‍हन तलाश करने का मंच आजकल समाज के परिचय सम्‍मेलन भी हैं। समाज की सक्रियता का यह परिणाम है कि हर वर्ग का समाज परिचय सम्‍मेलन कर रहा है जिसमें मुख्‍य रूप से जैन समाज, अग्रवाल समाज, ब्राम्‍हण समाज, स्‍वर्णकार समाज, कतिया समाज, सिरवैया समाज सहित आदि अपने-अपने इलाकों में सम्‍मेलन करके शादियों के लिए दुल्‍हा-दुल्‍हन तलाश कर रहे हैं। इन समाज के कर्ता-धर्ताओं को एक चिंता सताने लगी है कि सम्‍मेलन में युवकों की अपेक्षा युवतियां कम आ रही हैं। यानि जिस परिचय सम्‍मेलन में 50 लड़के आते हैं वहां पर सिर्फ 25 लड़कियां आ रही है। इस चिंता को दूर करने के लिए अब परिचय सम्‍मेलनों में लोगों से बेटा-बेटियों के बीच कोई भेदभाव नहीं करने का शपथ पत्र भरवाया जा रहा है। निश्चित रूप से परिचय सम्‍मेलन एक सार्थक कदम तो है, लेकिन उनकी चिंता भी बाजिब है।

Sunday, 22 April 2012

सतीप्रथा खत्‍म फिर भी औरत को जलाना बंद नहीं हुआ मप्र में

महिला आयोग की राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष ममता शर्मा : निसंकोच होकर अपना दर्द बताओ
           सतीप्रथा पूरी तरह से खत्‍म तो नहीं हुई है, क्‍योंकि इसके कीटाणू आज भी प्रदेश के कई हिस्‍सों में कायम है, लेकिन इसके विपरीत महिलाओं को जलाना आज भी बादस्‍तूर मप्र में जारी है। महिलाओं को जलाने की घटनाएं अखबारों की सुर्खिया बनती रहती है, कभी दहेज उत्‍पीड़न के नाम पर महिलाओं को जलाया जाता है, तो कभी शारीरिक शोषण पर इंकार करने से महिला को आग के हवाले कर दिया जाता है। अब तो महानगरों की तरह महिलाओं के खूबसूरत चेहरों पर तेजाब फेंककर उन्‍हें विद्रूप किया जा रहा है। हाल ही में एक स्‍कूल टीचर पर तेजाब फेंका गया है। यह सच है कि नगर वधु प्रथा पूरी तरह खत्‍म है, लेकिन बलात्‍कार की घटनाएं बढ़ गई हैं इसके साथ ही अपहरण, तस्‍करी और ऑ‍नर किलिंग ने महिला हिंसा को घिनौने रूप में सामने ला दिया है। यह सारी पी‍ड़ाएं 22 अप्रैल को भोपाल में महिला आयोग की राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष ममता शर्मा के सामने महिलाओं ने जाहिर की। यहां तक कि टीकमगढ़ नगर पालिका की पार्षद रानी ने भी गुहार लगाई कि उन्‍हें नगर पालिका अध्‍यक्ष देहिक शोषण के लिए बार-बार दबाव बना रहा है। यह मामला भाजपा की कार्यसमिति की बैठक ओरछा में भी उठ चुका है। इसके साथ ही महिलाओं के शोषण और अत्‍याचार की ढेरों कहानियां आयोग के सामने बयां की गई। महिला आयोग की राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष ममता शर्मा की यात्रा ने राजनैतिक रंग भी ले लिया है, क्‍योंकि उनकी जनसुनवाई के दौरान मप्र महिला आयोग की अध्‍यक्ष और सदस्‍यों ने शिरकत नहीं की। आयोग की राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष ममता शर्मा का कहना है कि उन्‍होंने सबको बुलाया था। इसके साथ ही उन्‍होंने जोड़ा कि मप्र महिला उत्‍पीड़न और अत्‍याचार में दूसरे नंबर पर है। वहीं दूसरी ओर मप्र महिला आयोग की अध्‍यक्ष उपमा राय का कहना है कि संवैधानिक पद पर बैठी महिला आयोग की अध्‍यक्ष को भोपाल में राजनीति नहीं करनी चाहिए। कुल मिलाकर महिला आयोग जिस मकसद से आया था उसमें कामयाब हो गया है, क्‍योंकि भाजपा सरकार के राज में महिलाओं की स्थिति उजागर करना उनका मकसद था। 
महिलाओं ने यह मामले उठाये : 
  • भोपाल दुग्‍ध संघ में कार्यरत यामिनी गिरी ने कहा कि अधिकारी मुझे रात में फोन कर बुलाते हैं और अनैतिक काम करने के लिए दबाव बनाते हैं। 
  • लोग शिक्षण संचालनालय में कार्यरत रेणु गुलाटी ने कहा कि अवकाश के दिन एक अफसर ने मुझे आफिस बुलाया और मेरे साथ छेड़खानी भी की गई। 
  • मंदसौर की महिला ने कहा कि सालभर पहले गांव के दबंगों ने बलात्‍कार किया, लेकिन आज तक रिपोर्ट नहीं लिखी गई। पति ने भी साथ छोड़ दिया है।  
  • भोपाल की महिला अंजू चौहान ने कहा कि कोख में एक महीने का बच्‍चा था, फिर भी सरकारी जेपी अस्‍पताल में मेरी नसबंदी कर दी गई अब डॉक्‍टर धमकी दे रहे हैं कि 30 हजार रूपये लेकर बच्‍चे को गिरा दो बरना जान से जाओंगी।

Saturday, 21 April 2012

मिशन 2013 फतह के लिए भाजपा तलाश रही रास्‍ते मप्र में

जोशी जी आप सही फरमा रहे : यह बात पूर्व सांसद विक्रम वर्मा ने एक बैठक में कही
          भाजपा नेता चिंतन, मंथन और बैठकों के लिए जाने जाते हैं। कोई भी बड़ा मुद्दा सामने आया तो भाजपा के नेता उस पर घंटों चिंतन, मंथन करते हैं और फिर जो निष्‍कर्ष निकलते हैं उस पर अमल भी करते हैं। फिर भले ही जनता उसे स्‍वीकार करें अथवा नहीं। भाजपा नेताओं को यह बीमारी संघ परिवार से लगी है। संघ परिवार चिंतन, मंथन में ही डूबा रहता है। इसको ग्रहण करने में भाजपा ने कोई कौर-कसर नहीं छोड़ी। मप्र में विधानसभा चुनाव में मात्र अब डेढ़ साल का समय बाकी है पर भाजपा अभी से मिशन 2013 फतह करने के लिए हरसंभव प्रयास करने में जुट गई है। कार्यसमिति की बैठकें हर तीन महीने में हो रही है। संगठन और सरकार में तालमेल बनाये रखने के लिए कौर ग्रुप की बैठकें भी लगातार हो रही हैं। इन बैठकों में एक चेहरा अचानक फिर से सक्रिय हुआ है। इस पर मुख्‍यमंत्री को बेहद विश्‍वास है यह चेहरा है भाजपा के महामंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का। तोमर अचानक मप्र की राजनीति में फिर से सक्रिय हो गये हैं। मप्र की राजनीति में अभी तक मुख्‍यमंत्री चौहान का एक छत्र राज भाजपा में कायम है। बीच-बीच में प्रभात झा अपनी ताकत का प्रदर्शन भी कर रहे हैं, लेकिन फिर भी भाजपा में नौ साल बाद भी कोई गुटबाजी फिलहाल तो नहीं है। थोड़ी बहुत नाराजगी और गुस्‍सा होना स्‍वाभाविक है। भविष्‍य की योजनाएं पार्टी बना रही है। सरकार अपने स्‍तर पर लगातार सक्रिय है, लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं है। विपक्ष सरकार की खामियों पर हमले कर रहा है। अवैध उत्‍खनन और भ्रष्‍टाचार तथा बिगड़ी कानून व्‍यवस्‍‍था एक बड़े मुद्दे राज्‍य में बन गये हैं, इनको लेकर भाजपा के वरिष्‍ठ नेताओं ने अपनी चिंता जाहिर की है। अब इस पर कितना अमल हो पाता है यह तो भविष्‍य ही बतायेगा, लेकिन फिर भी नेताओं ने अपना फर्ज अदा कर दिया है अब इस पर निर्णय सरकार और संगठन को करना है। 



Friday, 20 April 2012

अफसरों के मंथन पर भी अमृत क्‍यों नहीं निकल रहा मप्र में

बताओ विभाग में क्‍या नया चल रहा  : यह सवाल मुख्‍यमंत्री चौहान ने अधिकारियों से पूछा
             मध्‍यप्रदेश की छवि को देश के अन्‍य राज्‍यों के सामने चमकाने के लिए राज्‍य के मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के दिल में आग तो बहुत है और वे बार-बार अपने भाषणों में भी जिक्र करते हैं। विकास के नये आयमों को स्‍थापित करने के लिए अधिकारियों से लगातार मंथन करते हैं, उस पर मंत्रियों से फीडबैक लेते हैं, फील्‍ड की कमान स्‍वयं संभाल रखी है, वे हर दिन गांव और सड़कों पर दौरा करते हैं, सरकारी कार्यक्रमों में लाडली लक्ष्‍मी और कन्‍यादान योजनाओं का बखान करने का कोई भी मौका नहीं छोड़ते हैं, इसके बाद भी मध्‍यप्रदेश का विकास जस का तस क्‍यों है यह रहस्‍यमय है। हाल ही में जनगणना की एक रिपोर्ट जारी हुई है जिसमें मप्र में सबसे कम बुनियादी सुविधाएं देने वाला राज्‍यों में शामिल हो गया है। नागरिकों को आज भी शौचालय और शुद्व पानी नहीं मिल रहा है। यह जरूर है कि सीएम ने मुख्‍यमंत्री पेयजल योजना और मर्यादा अभियान चलाया हुआ है जिसमें हर गांव में शौचालय बनाने का लक्ष्‍य है। चौहान की तमन्‍ना है कि मप्र स्‍वर्णिम राज्‍य बने, लेकिन प्रदेश में पिछले छह महीने के दौरान जो घटनाएं सामने आई है, जिससे राज्‍य का विदुप चेहरा सामने आया है। आईपीएस की हत्‍या हो जाना, तहसील पर जेसीबी चलाने जैसी घटनाएं अब आम होती जा रही है। माफिया ने हर क्षेत्र में अपना ढंका बजा रखा है, उनके सामने पुलिस और व्‍यवस्‍था लाचार और असहाय हो गई है। इससे पहले कभी माफिया इतना ताकतवर राज्‍य में नहीं रहा है। वही दूसरी ओर यह भी सच है कि मुख्‍यमंत्री बार-बार लोगों को यह विश्‍वास दिलाते रहते हैं कि माफिया को जड़मूल से खत्‍म किया जायेगा। इसके बाद भी माफिया पनपता जा रहा है। 
मंथन पर अमृत क्‍यों नहीं निकल पा रहा : 
         मुख्‍यमंत्री चौहान लगातार फील्‍ड में दौड़ रहे हैं, अफसरों के साथ मंथन कर रहे हैं, आधी-आधी रात तक बैठकों का दौर चल रहा है। इसके बाद भी अमृत क्‍यों नहीं निकल पा रहा है। विभागों की योजनाएं सड़कों से गायब है, हर विभाग में भ्रष्‍टाचार की कहानियां कभी भी अखबारों की सुर्खिया बनती रहती हैं। अधिकारी और कर्मचारी फील्‍ड में जा नहीं रहे हैं। कितना दुखद है कि करोड़ों रूपया सरकारी विभाग के हर साल लैप्‍स हो रहे हैं उस राशि का कोई उपयोग नहीं हो रहा है। जमाना तेजी से बदल रहा है, लेकिन सरकारी विभाग आज भी अपनी ही रफ्तार से चले जा रहे हैं जिसके फलस्‍वरूप विभागों का अस्तित्‍व संकट में आ गया है। विभागों की योजनाएं अगर जनता तक नहीं पहुंच पा रही है, तो यह कहीं न कहीं सरकार की असफलता तो है, इस दिशा में भी विचार करने की आवश्‍यकता है कि आखिरकार हम कहा असफल हो रहे हैं।

Wednesday, 28 March 2012

भाजपा की छाती पर मूंग दलने आ गये दिग्विजय

आर्शीवाद दीजिए : भाजपा विधायक विश्‍वास सारंग पैर पड़कर आर्शीवाद लेते हुए दिग्विजय सिंह से
          कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की जुबान पर हर किसी की नाराजगी होती है। किसी भी गली-चौराहे पर दिग्विजय सिंह की चर्चा होते ही उनके खिलाफ अनर्गल लोगों का बोलना शुरू हो जाता है पर दिग्विजय सिंह बार-बार पत्रकार वार्ता में यह साबित करने पर तुले रहते हैं कि वे जो भी आरोप लगाते हैं वे बाद में प्रमाणित होते हैं। उनके मुखर विरोध की एक बड़ी वजह कट्टरवादी ताकतों के खिलाफ जहर उगलना है। फेसबुक और टियूटर पर टिप्‍पणियां लगातार लिखी जा रही हैं। इस सब के बाद भी दिग्विजय सिंह दमदारी से फिर मप्र में दहाड़ने लगे हैं और अब उनके निशाने पर है भाजपा सरकार। यह सच है कि उनके मुख्‍यमंत्रित्‍व कार्यकाल में प्रदेश सड़क, बिजली, पानी की गंभीर समस्‍या से जूझा है। दिग्विजय सिंह ने यूपी चुनाव में कांग्रेस को कोई करिश्‍माई मौजूदगी नहीं दिखाई है इसके चलते उनके बयानों पर फिर सवाल उठने लगे हैं। कांग्रेस की गुटबाजी को दरकिनार करते हुए दिग्विजय सिंह ने 28 मार्च को एलान कर दिया है कि वे अब मप्र में भाजपा की छाती पर मूंग दलने के लिए आ गये हैं और इस सरकार को उखाड़ फेंकने के बाद ही चैन से बैठेंगे। अपनी बयानबाजी को आगे बढ़ाते हुए सिंह ने मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, विधानसभा अध्‍यक्ष ईश्‍वरदास रोहाणी और भाजपा प्रदेशाध्‍यक्ष प्रभात झा के खिलाफ गंभीर आरोप लगाये हैं। रोहाणी पर खनिज माफिया को संरक्षण और देश द्रोही से रिश्‍ते साबित करने की कोशिश बयानों के जरिये की है, जबकि मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर सरकारी जमीन हड़पने का आरोप लगाया है। वही भाजपा प्रदेशाध्‍यक्ष झा तो उनकी नजर में कोई राजनीतिक हैसियत ही नहीं रखते हैं। यानि भविष्‍य में विवाद और गहरायेंगे। मप्र की राजनीति में दिग्विजय सिंह निश्चित रूप से कोई न कोई गुल खिलाते रहेंगे और यहां की शांति को अशांत करने में कोई कौर-कसर नहीं छोड़ेंगे। 

Sunday, 18 March 2012

मध्‍यप्रदेश में बौनी साबित हो रही है पुलिस

        ऐसा लगता है कि मध्‍यप्रदेश में पुलिस का खौफ खत्‍म हो गया है। अब पुलिस का काम सिर्फ गरीब, असहाय और आम आदमी पर डंडे चलाने तक सीमित रह गया है, लेकिन पुलिस उन लोगों के सामने असहाय और बौनी साबित हो रही है जो कि भाजपा के ताकतवर नेता हैं। ऐसे नेताओं के सामने तो पुलिस झुक-झुक कर सलाम करती है और वह नेता पुलिस को दौड़ा-दौड़ा कर मार रहे हैं। मप्र में नेता, माफिया गठजोड़ से पुलिस की शामत आ गई है। पिछले एक साल में भोपाल समेत पुलिस पर करीब 50 से अधिक की घटनाएं हो चुकी हैं। स्‍वयं गृहमंत्री उमाशंकर गुप्‍ता स्‍वीकार कर चुके हैं कि पिछले एक साल में भोपाल में ही पुलिस पर 25 से अधिक हमले की घटनाएं हुई हैं। इसके साथ ही हाल ही में मुरैना में तो आईपीएस अफसर नरेंद्र कुमार को अपनी जान गबानी पड़ी है। पुलिस के साथ मारपीट की घटनाएं मप्र में कोई नई बात नहीं है, लेकिन चिंता का पहलू यह है कि अगर थाने में भी जाकर पुलिस पर हमले होने लगे तो फिर उनका खौफ कहा बचेगा यह तो भगवान भी नहीं बता सकता। राजधानी में पिछले महीने राष्‍ट्रीय स्‍वयं सेवक संघ के कार्यकर्ताओं ने कमला नगर थाने में जाकर पुलिसकर्मियों के साथ न सिर्फ झूमा-झपटी की बल्कि मारपीट भी की गई जिस पर पुलिस के आला अधिकारियों ने पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया। भला हो मीडिया का कि इस मुद्दे पर बढ़ा हल्‍ला मचाया और अंतत: पुलिस मुख्‍यालय को उन पुलिसकर्मियों को बहाल करना पड़ा। 18 मार्च, 2012 को दमोह में तो भाजपा नेताओं ने पुलिस कर्मियों के साथ मारपीट के सारे रिकार्ड तोड़ दिये। अखबारों में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार दमोह के भाजपा नेताओं ने एक पुलिस कर्मी पर सरेआम हमला बोला, उस आरक्षक ने एटीएम में घुसकर अपनी जान बचाई। इसका मुख्‍य आरोपी जनपद सदस्‍य सौमेश गुप्‍ता है, जो कि भाजपा के प्रदेशाध्‍यक्ष प्रभात झा का करीबी माना जाता है। विवाद की जड़ पुलिस आरक्षक जहागीर खान और भाजपा नेता सौमेश गुप्‍ता के बीच सड़क पर साइड देने को लेकर हुआ। आरक्षक की इतनी पिटाई की गई है कि वह गंभीर रूप से घायल है फिलहाल तो पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। मप्र में पुलिस के साथ मारपीट की घटनाएं कोई नई बात नहीं है, ऐसी घटनाएं लगातार बढ़ रही है। राजधानी में तो एक आईपीएस अफसर की आंख भी फोड़ दी गई है। राज्‍य के मुख्‍यमंत्री लगातार कह रहे हैं कि पुलिस का खौफ अब खत्‍म हो गया है उसे नये सिरे से अपनी भूमिका अदा करना चाहिए, लेकिन जब राजनीतिक हस्‍तक्षेप बढ़ेगा, तब पुलिस कहा से कार्यवाही करेगी। कुल मिलाकर मप्र में कानून व्‍यवस्‍था तो ध्‍वस्‍त हो ही गई है अब ऊपर से पुलिस के साथ मारपीट की घटनाओं से साबित हो रहा है कि मप्र का भगवान ही मालिक है। 
                           ''जय हो मप्र की''

Saturday, 17 March 2012

वाह क्‍या दृश्‍य है

मनोरम दृय : मप्र के हरदा जिले में अजनाल नदी पर बने स्‍टापडेम पर बने पानी रोकने का झरना लोगों को बेहद आकर्षित करता है। यह स्‍थल खंडवा राजमार्ग से गुजरने वाले लोगों को कुछ पलों के लिए रोक ही देता है।
      प्रकृति और खूबसूरती की गोद में मध्‍यप्रदेश समाया हुआ। जहां निगाहें डाले वहीं प्रकृति स्‍वागत करती नजर आती है। हर तरफ हरियाली छाई हुई है खूबसूरती की छटा निराली है। न सिर्फ प्रकृति के अलावा ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहर भी कदम-कदम पर मिलती है। इसके बाद भी सरकार पर्यटक को लुभाने के लिए जैसी मशक्‍कत करनी चाहिए वैसी अभी भी नहीं हो रही है। मध्‍यप्रदेश में हर क्षेत्र में पर्यटन की अपार संभावनाएं विकसित की जा सकती है। धार्मिक पर्यटन और मेले में आज भी लोगों का हुजूम टूटता है, जो कि हमारे अपने राज्‍य के लोग होते हैं। निश्चित रूप से राज्‍य की भाजपा सरकार ने धार्मिक मेलों को व्‍यवस्थित ढंग से आयोजित करने के लिए मध्‍यप्रदेश मेला प्राधिकरण का गठन कर दिया है। इसके साथ ही धार्मिक स्‍थलों को धार्मिक नगरी बनाने के लुभावने सपने बार-बार दिखाये जा रहे हैं इसके बाद भी जो विकास की एजेंसियां है उस गति से कार्य नहीं कर रही है जिस गति से की जानी चाहिए। गुजरात और उ0प्र0 से ज्‍यादा संभावनाएं मध्‍यप्रदेश में पर्यटन क्षेत्र से है। ऐसा नहीं है कि इस दिशा में काम नहीं हो रहा है लेकिन जिस रफ्तार से कार्यों का अंजाम दिया जाना चाहिए वैसा अभी भी नहीं हो पा रहा है। मप्र के पर्यटन मंत्री तुकोजीराव पवार हमेशा अस्‍वस्‍थ रहते हैं और उनके कामकाज अधिकारियों के जिम्‍मे हैं। वर्ष 2003 के बाद रेलवे सेवा के अधिकारी अश्विनी कुमार को मध्‍यप्रदेश पर्यटन विकास निगम का प्रबंध संचालक बनाया गया था, तो उन्‍होंने आते ही निगम की न सिर्फ आवो-हवा बदली, बल्कि ऐसे उल्‍लेखनीय कार्य किये हैं, जो कि अमिट हो गये हैं। यूं तो पर्यटन के क्षेत्र में तेजी से विस्‍तार करने की जिम्‍मेदारी मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की है पर वे सामाजिक संरचना को ताकत देने के लिए बेटी बचाओ अभियान और लाडली लक्ष्‍मी योजनाओं पर अधिक जोर दे रहे हैं। निश्चित रूप से उनके अपने ड्रीम प्रोजेक्‍ट हैं, लेकिन अगर पर्यटन सेक्‍टर में बीच-बीच में ध्‍यान दिया जाये, तो यह इलाका भी न सिर्फ रोजगार की बरसा करेगा, बल्कि धन लक्ष्‍मी भी हर क्षेत्र में बरसेगी बस इसके लिए सरकार को चौकस रहने के साथ-साथ पर्यटन स्‍थलों के आसपास निर्माण कार्यों को व्‍यवस्थित ढंग से करना होगा। विशेषकर पहुंच मार्ग और हर सुविधा पर्यटक को मिले इस दिशा में ध्‍यान देने की जरूरत है। मप्र की राजधानी भोपाल से जुड़े पर्यटन स्‍थल न सिर्फ देशभर में बल्कि पूरी दुनिया में अपना एक अलग स्‍थान बनाये हुए है। दो स्‍थलों को अंतर्राष्‍ट्रीय पर्यटन स्‍थल के रूप में जाना जाता है जिसमें सांची का बौद्व स्‍तूप और पुरातात्विक स्‍थल भीम बैठिका शामिल हैं। इसके साथ ही भोपाल में दुनिया भर में पहचान रखने वाली ताजुल मस्जिद, भारत भवन, वन बिहार, मानव संग्राहलय, भोजपुर सहित आदि पर्यटक स्‍थल हैं। इन क्षेत्रों को आज भी विकास की दरकार है, लेकिन सरकार को जो गंभीर कार्यों के लिए दिखानी चाहिए उसमें कहीं भी तेजी नजर नहीं आती है। 
                           ''जय हो मध्‍यप्रदेश की''

Wednesday, 7 March 2012

परचम फैलाया उमा भारती ने यूपी में

        मध्‍यप्रदेश के राजनेताओं की नेत़त्‍व क्षमता पर जब तब सवाल उठते रहे हैं पर राज्‍य में ऐसे भी नेता जिन्‍होंने न सिर्फ मप्र की सरजमी पर अपने आपको स्‍थापित किया है, बल्कि राज्‍य की सीमा से बाहर जाकर मप्र का झंडा अन्‍य राज्‍यों में लहराया है। इनमें साधवी और पूर्व मुख्‍यमंत्री उमा भारती का नाम भी शुमार हो गया है। वैसे तो ऐसे नेताओं की संख्‍या गिनी जाये तो बहुत सीमित है, क्‍योंकि मप्र से बाहर जाकर चुनाव जीतना हर किसी नेताओं में क्षमताएं नहीं है। यह परंपरा सबसे पहले समाजवादी नेता शरद यादव, फिर कांग्रेस नेता अर्जुन सिंह और अब उमा भारती ने यूपी में चरखारी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर मप्र का नाम रोशन किया है। सुश्री उमा भारती ने मात्र एक पखवाड़ा ही चरखारी की जनता के बीच दिया। लेकिन फिर भी उमा की जीत ने साबित कर दिया कि मप्र के नेता भी अन्‍य राज्‍यों में झंडा गाड़ सकते हैं। यूं भी उमा भारती की लोकप्रियता राष्‍ट्रीय स्‍तर पर है उनकी वाकपटुता और भाषण शैली से आम आदमी प्रभावित होता है। उनके बारे में कहा जाता है कि वे देश में कहीं भी चली जाये, भीड़ अपने आप उनके पीछे आने लगती है। उमा ने चरखारी से चुनाव जीतकर न सिर्फ मप्र का सिर ऊंचा उठाया है, बल्कि अपनी राजनीतिक यात्रा में एक नया मुकाम भी हासिल किया है। लंबे समय तक वे राजनीतिक वनवास भोग रही थी, लेकिन भाजपा ने उन्‍हें यूपी में चुनावी बागडोर सौंपकर एक बार फिर उनके प्रति विश्‍वास जाहिर किया है।
 निश्चित रूप से उमा भारती अब मप्र के साथ-साथ उप्र में भी अपना परचम फहरा चुकी हैं। इसी प्रकार जनता दल यूके राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष और एनडीए के संयोजक शरद यादव तो बिहार, यूपी, हरियाणा से लोकसभा और राज्‍यसभा में पहुंचे हैं। शरद यादव भी मप्र में जबलपुर से सबसे पहले सांसद बने और उसके बाद उन्‍होंने देश की राजनीति में अपना एक अलग मुकाम बना लिया है। वही दूसरी ओर कांग्रेस के इकलौते नेता अर्जुन सिंह ने भी देश की राजधानी दिल्‍ली से लोकसभा चुनाव जीतकर राजनीति में एक रिकार्ड बनाया था। मप्र में अमूमन राजनेता दूसरे राज्‍यों में जाकर चुनाव नहीं लड़ते हैं, लेकिन कुछ बिरले नेता होते हैं जो मप्र की सीमाओं से बाहर जाकर अपना जौहर दिखाने में कोई अवसर नहीं छोड़ते हैं उनमें अब साधवी उमा भारती भी शामिल हो गई हैं।

Friday, 2 March 2012

शेहला हत्‍याकांड : डायरी के पन्‍ने खोल रहे हैं राज

          अंतत: सीबीआई शेहला मसूद हत्‍याकांड की परते खोलने की दिशा में आगे बढ़ रही है और कभी शेहला मसूद की गहरी दोस्‍त रही जाहिदा परवेज के दफ्तर से मिली डायरी कई राज खोल रही है जिसमें जाहिदा का भाजपा विधायक ध्रुवनारायण सिंह से गहरा प्रेम भी झलक रहा है। सीबीआई को आशंका है कि कहीं शेहला की हत्‍या त्रिकोणीय प्रेम की वजह से तो नहीं हुआ है। जाहिदा की डायरी से मिले राज यह जाहिर कर रहे हैं कि वह विधायक सिंह से बेहद मोहब्‍बत करती थी और हर हाल में विधायक को अपने निकट पाने की कोशिश में रहती थी। डायरी से मिली बाते जाहिर कर रही है कि जाहिदा और ध्रुव के बीच गहरी दोस्‍ती थी इसी के चलते जाहिदा ने अपने प्रेमी पर पूरी तरह से वर्चस्‍व बनाये रखने के लिए शेहला मसूद की हत्‍या करा दी। फिलहाल तो यह सब डायरी बया कर रही है, लेकिन भविष्‍य में इन मामलों में अभी राज खुलना और बाकी है। प्रेम में जाहिदा इस कदर डूब गई थी कि उसे दर्द और प्यार भरी शायरी खासी पसंद आने लगी थी। वह डायरी में भी अपनी शायरी लिखकर अपने प्‍यार का इजहार किया करती थी। जाहिदा की शायरी के कुछ अंश यहा - 
           मोम के जिस्‍म पिघलते जब हैं, तो
                              पतंगों के दिल भी जलते हैं,  जिनको 
          खुद पर नहीं भरोसा, वे तो भीड़ के 
                   साथ चलते हैं।।
          कैसे पहचान लेंगे चेहरे, 
                  आजकल लोग हर पल रंग बदलते हैं।
          प्‍यार से सींचकर देखों दोस्‍तों, 
                  पतझड़ में भी पेड़ फलते हैं।।

वाह चेतन भगत तुम्‍हें बार-बार सलाम, एमपी असली इंडियन

         यूं तो मध्‍यप्रदेश को कभी पिछड़ा राज्‍य, बीमारू, अर्धशिक्षित, गंबार, जागरूक नहीं, लड़ाकू लोग नहीं जैसे आदि जुमलों से समय-समय पर जानी-मानी हस्तियां उछालती रही है, लेकिन लंबे समय बाद जाने-माने अंग्रेजी लेखक चेतन भगत ने मप्र का सिर न सिर्फ ऊंचा किया है, बल्कि मप्र वासियों को नई राह भी दिखाई है। वाह चेतन भगत आपको बार-बार सलाम कि आपने मप्र को असली इंडियन कहकर एक बढ़ा महत्‍वपूर्ण दर्जे से नवाजा है जिसके लिए आपको बार-बार नमन। दिलचस्‍प यह है कि   02 मार्च, 2012 को भोपाल में एक कार्यक्रम के दौरान लेखक चेतन भगत ने मप्र की चर्चा में भाव-विभोर होकर कहा कि यहां पर हिन्‍दी है, एमपी में हिंदी का बोल बाला है। बाहर कोई गुजराती और बंगाली नहीं है यही वजह है कि मध्‍यप्रदेश के लोग असली इ‍ंडियन है अन्‍यथा किसी भी राज्‍य में चले ज‍ाइयेगा तो पहले वह अपने आपको गुजराती, बिहारी, मराठी कहलाने में गर्व करते हैं। गुजरात वाले आपस में मिलकर गुजराती हो जाते हैं, पंजाब वाले साथ हो तो पंजाबी हो जाते हैं, लेकिन मध्‍यप्रदेश का व्‍यक्ति कभी गुट नहीं बनता वह हमेशा हिन्‍दुस्‍तानी रहता है। उन्‍होंने दुखी मन से कहा कि आज तक देशभर के 75 शहरों में युवाओं से संवाद कर चुका हूं और हर क्षेत्र में लोगों से मिला हूं लेकिन एक देश की कमी मुझे हर जगह महसूस होती थी, लेकिन मप्र के लोगों में दिखती है। निश्चित रूप से अंग्रेजी लेखक चेतन भगत ने मध्‍यप्रदेश्‍ावासियों को दिल से एक बढ़ा तोहफा दे दिया है कि यह राज्‍य अपनी भाषा की सीमाओं में बंधा हुआ नहीं है, बल्कि राष्‍ट्रीयता से ओत-प्रोत है। अन्‍यथा मध्‍यप्रदेश को लेकर इसी राज्‍य से जुड़े राजनेता समय-समय पर ऐसी-ऐसी टिप्‍पणियां करते हैं जिससे राज्‍य के रहवासियों का सिर शर्म से झुक जाता है। बीते दिनों में एनडीए के अध्‍यक्ष और मप्र की भूमि से जुड़े नेता शरद यादव ने तो मप्र के लोगों को लड़ाकू नहीं होने की संज्ञा से नबाजा था। इसी के साथ ही कई नेता इसको बीमारू और पिछड़ा राज्‍य भी कहने से नहीं चूकते हैं। यह सच है कि मप्र के लोग सीधे-सादे और सरल स्‍वभाव के लोग हैं, वे षड़यंत्र करने में ज्‍यादा विश्‍वास नहीं करते हैं यही वजह है कि विकास का जो पहिया घूमना चाहिए वह अभी घूम नहीं पा रहा है, लेकिन प्रदेश की जनता के लिए इससे ज्‍यादा क्‍या सुखद होगा कि राज्‍य लगातार विकास के पायदान पर चढ़ता ही जा रहा है। 
                      '' जय हो मप्र की''
 

Thursday, 1 March 2012

शेहला हत्‍याकांड : राजनीति और अपराधीकरण का एक चेहरा भी सामने आया

     मध्‍य प्रदेश का हाईप्रोफाइल शेहला मसूद हत्‍याकांड से कई चेहरे बेनकाब हो रहे हैं। राजनीति और अपराधीकरण का गठजोड़ भी सामने आ रहा है, जो चौका रहा है। अमूमन यह कहा जाता है कि राजनेता और अपराधियों के बीच मिली-भगत का खेल पर्दे के पीछे चलता है, लेकिन मप्र में पिछले एक दशक से ऐसी घटनाएं सामने आ ही है जिससे राजनेता और अपराधियों का खुलासा हो रहा है इन घटनाओं को लेकर न तो राजनीतिक दलों में कोई चिंता है और न ही उससे बचने के कोई उपाय खोजे जा रहे हैं, बल्कि मामला सामने आने के बाद तर्कहीन बाते करते हैं। शेहला मसूद कांड में गिरफ्तार हुए अपराधी से निकटता  भाजपा के प्रदेशाध्‍यक्ष प्रभात झा की निकटता से कई सवाल खड़े हो गये हैं, क्‍योंकि फोटो में झा के पीछे अपराधी डेंजर का खड़ा होना ही मायने रखता है। अब भले ही प्रभात झा सफाई दें कि जनता को अपराधी के तौर पर नहीं देख सकते, भीड़ में कौन अपराधी है यह समझ पाना कठिन है। निश्चित रूप से झा को नहीं मालूम होगा कि उनके मंच पर कोई अपराधी है, लेकिन जब भाजपा के कार्यक्रम में लगातार अपराधियों को मंचों पर देखा जाता है, तो यह डर सताने लगता है कि कहीं मप्र की राजनीति में भी अपराधियों की घुसपैठ तो नहीं हो रही है। इससे पहले भी कांग्रेस सरकार के दौरान भी कई बड़े दिग्‍गज नेताओं और अपराधियों के मामले सामने आ चुके हैं जिन पर काफी विवाद हुआ है। पूर्व मुख्‍यमंत्री दिग्विजय सिंह ने तो अपने कार्यकाल में माफिया और राजनीति के गठबंधन पर एक कमेटी बनाई थी उसकी रिपोर्ट आज भी मंत्रालय में धूल खा रही है। अब नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह कह रहे हैं कि शेहला मसूद हत्‍याकांड में शामिल एक अपराधी के साथ झा के चित्र से जाहिर हो गया है कि भाजपा का चाल, चरित्र और चेहरा क्‍या है। झा हमेशा दूसरों को नसीहत देने में हमेशा आगे रहे हैं अब उनके रिश्‍ते अपराधियों के साथ उजागर हो रहे हैं जिससे साफ जाहिर है कि भाजपा नेताओं का अपर‍ाधियों से गहरा गठजोड़ है। कुल मिलाकर मप्र की राजनीति में माफिया और अपराधियों के गठजोड की नई-नई कहानियां जन्‍म ले रही है जिन्‍हें रोकने पर विचार करना होगा अन्‍यथा प्रदेश की राजनीति को दूषित और प्रदूषित होने से कोई नहीं रोक पायेगा।

Wednesday, 29 February 2012

कर्जे पर हो रहा है मप्र रोशन


       विकास की सीढि़या लगातार चढ़ना हर राज्‍य के लिए सपना होता है। विकास का पहिया भले ही मध्‍यप्रदेश में धीमा चल रहा हो, लेकिन सरकार इस विकास की गाड़ी को गति देने की इच्‍छा तो रखती है, लेकिन यह सवारी भी कर्ज पर हो रही है। आज मप्र कई क्षेत्रों में उल्‍लेखनीय काम कर रहा है, लेकिन राज्‍य 78 हजार करोड़ के कर्जे से रोशन हो रहा है। वित्‍त मंत्री राघव जी ने विधानसभा में 28 फरवरी को बजट पेश करते हुए कहा कि प्रदेश पर कर्जा अवश्‍य बढ़ गया है, लेकिन इस पर ब्‍याज के रूप में मात्र 9 प्रतिशत राशि ही राज्‍य को देनी पड़ रही है, जो कि पूर्व में 22 प्रतिशत थी। प्रदेश पर वर्तमान में लगभग 80, 542 करोड़ का कर्जा है जो असहज नहीं है। एक लाख करोड़ वाले राज्‍यों की सूची लंबी है। निश्चित रूप से वित्‍त मंत्री राघव जी ने इस बार अपना लुभावना बजट पेश किया है और पेट्रोल पर वैट कर घटाया गया है, जबकि कर्मचारियों को भी गद-गद कर दिया है। इस बजट में द़ष्टि के अभाव की बातें हो रही है, क्‍योंकि दूरगामी द़ष्टिकोण बजट में कहीं भी दिखाई नहीं दे रहा है। 
बजट और मध्‍यप्रदेश : 
    वित्‍त मंत्री राघव जी ने 9वीं बार बजट पेश किया। जिसमें 10 हजार 17 करोड़ का राजकोषीय घाटा है। कुल बजट 80,030.98 करोड़ का है। इस बार सड़क पर 4694 करोड़ का प्रावधान है। पिछले साल की अपेक्षा 53 प्रतिशत राशि अधिक मिली है, जबकि बिजली पर 7710 करोड़ तय किया, जो कि पिछले साल की अपेक्षा 49 प्रतिशत अधिक है।  वर्तमान में प्रतिव्‍यक्ति आय 37,744 रूपये है और जीडीपी 9 प्रतिशत है। यानि आज भी हम छत्‍तीसगढ से प्रतिव्‍यक्ति आय में पीछे हैं। 
नंदन दुबे मप्र के नये पुलिस मुखिया : 
     मप्र के नये पुलिस महानिदेशक नंदन दुबे ने 29 फरवरी को कार्यभार ग्रहण कर लिया है। भारतीय पुलिस सेवा के 1976 बैच के अधिकारी एसके राउत की जगह स्‍थान लेंगे। दुबे के बारे में कहा जाता है कि वे नियम, कानून के सख्‍त और ईमानदार माना जाता है। इनका कार्यकाल 30 सितंबर,2014 को समाप्‍त होगा। दुबे मानना है कि उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती कानून बनाये रखना है। दलित और महिलाओं पर अत्‍याचार रोकने के हरसंभव प्रयास किये जायेंगे, पुलिस किसी को भी असहाय होने का अभास नहीं होने देगी। 
थानों में संघ परिवार की दादागिरी : 
     पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट मप्र में आम बात हो गई है। राष्‍ट्रीय स्‍वयं सेवक संघ के कार्यकर्ता थानों में जाकर हंगामा करने लगे हैं और मारपीट पर भी उतारू हा जाते हैं। हाल ही में राजधानी के एक थाने में संघ परिवार के स्‍वयंसेवकों ने पुलिस‍कर्मियों के साथ मारपीट की, लेकिन उन पर तो कोई कार्यवाही नहीं हुई, बल्कि भोपाल के आईजी ने जो पुलिसकर्मी स्‍वयंसेवकों से पिटे थे उन्‍हें ही निलंबित कर दिया है तथा निलंबित होने वाले कर्मचारियों की संख्‍या दस है। मप्र की सरकारी मशीनरी में लगातार हस्‍तक्षेप संघ परिवार का बढ़ता ही जा रहा है। 
                   '' जय हो मप्र की'' 

परते अभी खुलना बाकी है शेहला हत्‍याकांड की, जनचर्चा का विषय बना



     किसी फिल्‍म की तरह मप्र की राजधानी भोपाल में आरटीआई कार्यकर्ता शेहला मसूद की हत्‍या की परते सीबीआई धीरे-धीरे सुलझाने की ओर बढ़ रही है। अभी तक तो यह कहा जाता था कि सीबीआई अपनी जांच में 6-8 माह में भी कोई खास निष्‍कर्ष पर नहीं पहुंच पा रही थी। हाईप्रोफाइल बना शेहला मसूद हत्‍याकांड राजनीति के सफेदपोश के लिए दिल धड़काने बढ़ाने वाला है, क्‍योंकि कहीं-कहीं इशारे राजनेताओं की ओर भी हो रहे हैं। 28-29 फरवरी को इस मामले ने नया रूख लिया है और शेहला मसूद की कभी दोस्‍त रही आर्टिकेट जाहिदा परवेज को सीबीआई ने पकड़ा है। फिलहाल तो वह सीबीआई की रिमांड पर रहेगी, इसके साथ ही शाकिब डेंजर को भी पकड़ा है। इस मामले में दिलचस्‍प यह है अभी तक हत्‍याकांड को लेकर पूरी पिक्‍चर का खुलासा नहीं हुआ है और अभी इस तथ्‍य का खुलासा होना है कि आखिरकार शेहला मसूद की हत्‍या किन कारणों से की गई है। सीबीआई सारे मामले का खुलासा एक साथ करने वाली है। वैसे तो अदालत में जाहिदा अपने बयान से पलट गई है और अपने आपको बेकसूर बताया है तथा साथ ही इस बात से भी इंकार किया है कि उसने अपने पति से शेहला के अवैध संबंधों को लेकर हत्‍या की है। यहां दिलचस्‍प यह है कि जिस शाकिब डेंजर को सीबीआई ने पकड़ा है वह भाजपा से जुड़ा हुआ है और पार्टी के कई बड़े नेताओं के साथ उसकी तस्‍वीरें मीडिया में छप गई हैं। प्रारंभिक जांच में सीबीआई से जो संकेत मिल रहे हैं उससे लग रहा है कि पर्यटन विकास निगम के ठेकों को लेकर दोनों के बीच तना-तनी हुई थी। इसी के चलते शेहला बार-बार जाहिदा को धमकियां देती थी फिर जाहिदा ने शेहला की हत्‍या करने के लिए उ0प्र0 के एक सूटर को सुपारी दी थी। फिलहाल तो इस मामले को लेकर विभिन्‍न कहानियां राजधानी में हर तरफ गूंज रही है। हर व्‍यक्ति अपनी नई कहानी बया कर रहा है, लेकिन अभी भी पूरी कहानी पर से पर्दा उठना बाकी है, क्‍योंकि इस पूरे हत्‍याकांड की जब परते खुलेगी तो कई चेहरे बेनकाब हो जायेंगे, क्‍योंकि शेहला मसूद की निकटता पिछले आठ सालों में भाजपा के नेताओं से जग-जाहिर थी। 
                                  ''जय हो मप्र की''

Saturday, 25 February 2012

उड़न खटोले पर सबार होकर दुल्‍हन लेने पहुंचा दूल्‍ला


        अमूमन मप्र में बारात घोड़े या कार पर सवार होकर निकलने का रिवाज है, लेकिन इस परंपरा को तोड़ा है किसान के एक बेटे ने। यह किसान का दूल्‍ला बेटा उड़न खटोले पर सवार होकर दुल्‍हन को लेने पहुंच गया विदिशा। आजकल शादियां शान और शौकत का प्रतीक बनती जा रही है अब इसमें परंपराएं तोड़ने वालों का रूतबा कायम हो रहा है। 25 फरवरी को मप्र की राजधानी भोपाल के बागमुगलिया के गांव बर्राई में रहने वाले किसान अवधनारायण मीणा ने अपने छोटे पुत्र बलवीर सिंह मीणा की बारात विदिशा उड़न खटोले में सवार होकर निकाली। विदिशा जिले में उड़न खटोले पर सवार होकर दूल्‍हा पहली बार आया है। इस शान-शौकत पर एक से डेढ़ लाख रूपये खर्च हो गये हैं। इसके बाद भी दूल्‍ला का पिता गर्भ से कहता है कि हम तो अपने बेटे की इच्‍छा पूरी करने के लिए अपनाया है अन्‍यथा मप्र में तो आज भी दलित नौजवानों को घोड़ी पर चढ़कर भी बारात निकालना गुनाह माना जाता है। अगर दलित युवक घोड़े पर चढ़कर दबंगों के सामने से बारात निकाले तो यह उन्‍हें नागवार गुजरता है। जहां एक ओर घटिया मानसिकता एक ओर कायम है वहीं दूसरी ओर उड़न खटोले पर बारात ले जाने का एक नया नबावी दौर भी शुरू हुआ है। चलिए इस बहाने मप्र का किसान शान से तो कह सकता है कि वह भी उड़न खटोले पर बारात निकालने में सक्षम है। 
युवती का शिव प्रतिमा से विवाह :
      मंदिरों में शादियां होना सामान्‍य बात है, लेकिन अगर कोई युवती मंदिर में स्‍थापित प्रतिमा से ही शादी कर लें तो उसे चौंकाने वाली घटना ही कहा जायेगा। ऐसा करिश्‍मा मप्र के भिण्‍ड जिले में हुआ है, जहां पर 24-25 फरवरी को शिव आराधना में लीन रहने वाली सरिता शर्मा ने अपने घर के नजदीक बने नर्मदेश्‍वर शिव मंदिर पर शिवजी के साथ विवाह रचा लिया है। सरिता शर्मा के पिता हरनारायण शर्मा मालनपुर इलाके में रहते हैं। इस युवती ने हिन्‍दू रीति-रिवाज से शिव आराधना में लीन रहने के लिए शिव जी के साथ विवाह रचाया है। यह अपने आप में इतिहास बन गया है और इस तरह की घटनाएं कम होती हैं। निश्चित रूप से मप्र में यह एक अनूंठी घटना है और युवतियां का भगवान से शादी करने के प्रसंग समय-समय पर सुनाई देते हैं। 
ग्‍वालियर एयरवेस और मिराज : 
     मप्र के ग्‍वालियर के महाराजापुरा वायुसेना स्‍टेशन से उड़ान भरने वाले नौ विमान दुर्घटनाग्रस्‍त हो चुके हैं इनमें से आठ हादसे मिराज 2000 श्रेणी के विमानों से जुड़े हुए हैं। इन दुर्घटनाओं में वायुसेना को अपने तीन पायलटों को भी खोना पड़ा है। ग्‍वालियर का महाराजापुरा स्‍टेशन वायुसेना के प्रमुख लड़ाकू विमान 2000 का वेस है। यहां सबसे पहले 1987 में एक मिराज दुर्घटनाग्रस्‍त हुआ था। इसके बाद 08 अक्‍टूबर, 1989 को घटना हुई थी जिसमें एक बिग कमांडर की मौत हो गई थी, इसके बाद 27 जनवरी 1994 को मिराज के तीन हादसे हुए, जबकि वर्ष 2004 में एक की मौत हुई थी। 24 फरवरी, 2012 को एक बार फिर से मिराज विमान दुर्घटनाग्रस्‍त हो गया जिसमें दोनो पायलट सुरक्षित निकल आये हैं। निश्‍चित रूप से बार-बार मिराज के दुर्घटनाग्रस्‍त होने से वायुसेना की भूमिका पर सवाल तो उठते ही हैं। 

Thursday, 23 February 2012

आर्थिक अनियमितताएं, भ्रष्‍टाचार करने में आईएएस अफसर भी अव्‍वल

       कहा जाता है कि आईएएस अधिकारी नियम कायदों से काम करने के लिए जाने जाते हैं, लेकिन मप्र में आईएएस अधिकारी नियम तोड़कर काम करने की कला में माहिर से हो गये हैं और उन पर किसी जांच एजेंसी का कोई खौफ नहीं है यही वजह है कि मुख्‍य सचिव अ‍वनि वैश्‍य से लेकर पचास से अधिक आईएएस अफसरों के खिलाफ लोकायुक्‍त एवं आर्थिक अपराध अन्‍वेषण ब्‍यूरो में प्रकरण दर्ज है पर किसी पर भी कार्यवाही होना तो दूर जांच तक समय पर नहीं हो पाती है। आलम यह है कि आईएएस अधिकारी सेवानिव़त्‍त हो जाते हैं, तब भी उनके खिलाफ मामले चलते रहते हैं, लेकिन मजाल है कि उनका बाल भी बाका हो जाये। इसकी एक बड़ी वजह मप्र में राजनीति का बंजर होना है। यहां के राजनेता न तो विषयों की समझ रखते हैं और न ही नियम प्रक्रिया से काम करने की कला जानते हैं जिसके चलते जो आईएएस अफसर कह देते हैं उसी राह पर चल पड़ते हैं यही वजह है कि सत्‍ता में आने के बाद राजनेता पूरी तरह से नौकरशाहों के हाथ के खिलौना बन जाते हैं। 
मप्र का विकास और अफसरों का भ्रष्‍टाचार :
      दु:खद पहलू यह है कि मप्र अपनी स्‍थापना के 50 साल से अधिक के सफर के बाद आज भी पिछड़ेपन के कलंक से बाहर नहीं निकल पाया है। राज्‍य में न तो रोजगार का कोई साधन विकसित हो पाये हैं और न ही उद्योगों का जाल फैल पाया है। गांव-गांव में विकास की बड़ी बातें की जाती है, लेकिन तब भी ग्रामीण क्षेत्र आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। देश में जहां प्रति हजार पर 2007 में 25 लोगों को नौकरियां मिल रही थी वहीं मप्र में 2010 में केवल 19 लोगों को ही अवसर मिल पाये हैं। सामाजिक संरचना का आलम यह है कि मप्र में आज भी शिशु म़त्‍युदर सबसे अधिक है। इसके बाद भी लाडली बचाव और बेटी बचाओ अभियान तो चल रहा है, लेकिन मप्र में जनसंख्‍या प्रति दशक में 20 फीसदी से अधिक की रफ्तार से बढ़ रही है। राज्‍य में 43 फीसदी लोग खेती से जुड़े हैं, लेकिन तब भी किसानों की आत्‍महत्‍या और पालन का सिलसिला थम नहीं रहा है। ऐसी स्थिति में नौकरशाह क्‍या कर रहे हैं यह आसानी से समझा जा सकता है। 
कौन करें आईएएस अफसरों पर कार्यवाही :
       मप्र में नौकरशाहों को लेकर हर साल कोई न कोई मामला उनकी गड़बडि़यों के उजागर हो रहे हैं। हाल ही में आईएएस अधिकारी राघवचंद्रा जमीन घोटाले में तो फंसे हैं, लेकिन सुप्रीमकोर्ट के बार-बार कहने के बाद भी राज्‍य सरकार चालान पेश नहीं कर पा रही है अब कोर्ट ने सख्‍त आदेश दिये हैं कि कार्यवाही करें अन्‍यथा सीएस पर अवमानना की कार्यवाही होगी। इसके बाद सरकार की नींद खुली है वही दूसरी ओर 23 फरवरी को विधानसभा में मुख्‍यमंत्री ने स्‍वीकार किया है कि लोकायुक्‍त में 45 आईएएस अफसरों के खिलाफ मामले दर्ज हैं। आईएएस अ‍फसर अरूण पांडे के खिलाफ 2005 से जांच चल रही है, जबकि पूर्व आईएएस अधिकारी एम0एस0भिलाला के खिलाफ तो 2004 से जांच चल रही है और अब वे सेवानिव़त्‍त हो गये हैं इसी प्रकार एक अन्‍य पूर्व आईएएस अधिकारी एम0ए0खान के खिलाफ तो 2009 से जांच चल रही है, लेकिन परिणाम ढाक के तीन पात हैं। यही आलम एमपीएसआईडीसी के तत्‍कालीन प्रबंध संचालक अजय आचार्य के खिलाफ 2004 में प्रकरण दर्ज हुआ था और इस मामले में चालान 2010 में पेश हो पाया है। इससे साफ जाहिर है कि मामले किस प्रकार से आईएएस अधिकारियों के दबाये जाते हैं। राज्‍य सरकार हमेशा आईएएस अफसरों के मामलों में चालान पेश करने में आना-कानी करती रही है। जिन अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन की अनुमति नहीं दी जा रही है उनमें अ‍वनि वैश्‍य, जीपी सिंघल, एसके मिश्रा, आरएस जुलानिया, एमके वार्ष्‍णेय, निकुंज श्रीवास्‍तव, मनीष श्रीवास्‍तव, अरूण पांडेय, एमएस भिलाला, शशिकर्णावत, सभाजीत यादव, राजेश राजौरा, अंजू सिंह बघेल, राजकुमार पाठक, केपी राही, निशांत बरबड़े, सुखवीर सिंह, सलीना सिंह, अजात शत्रु, आकाश त्रिपाठी, अरविंद जोशी, एमके सिंह, नवनीत कुठारी, अरूण कुमार भट्ट, पंकज राग, बीएन सिंह, विवेक अग्रवाल, सीबी सिंह, राकेश श्रीवास्‍तव, राघव चंद्रा, रश्मि, एमएम उपाध्‍याय, मनोहर अगनानी, एसआर मोहंती, मनोज झलानी, एमए खान, राजकुमार माथौर, अजय आचार्य, पी0 नरहरि, पी0 राघवन आदि शामिल हैं। इससे साफ जाहिर है कि सरकार इन अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन की स्‍वीक़ति नहीं देती है। इससे राज्‍य सरकार का दोहरापन भी उजागर हो रहा है। वहीं आईएएस अधिकारी अपने हिसाब से मनमर्जी करने पर उतारू होते हैं।