रविवार, 11 अगस्त 2013

थम नहीं रही है मध्‍यप्रदेश में टोपी पर सियासत

          मध्‍यप्रदेश में राजनीति की दशा और दिशा तेजी से बदल रही है। राजनेताओं ने भी अब जो बुनियादी मुद्दे हैं उनको छोड़कर ऐसे मुद्दों पर हल्‍ला मचाना शुरू कर दिया है, जिनसे समाज में तनाव का वातावरण बन और वोटो का खजाना भी खुले। इसके चलते मध्‍यप्रदेश का विकास एक बार फिर राजनेताओं के भाषण से गायब होने लगा है। मुख्‍यमंत्री जरूर विकास और मप्र को स्‍वर्णिम राज्‍य बनाने का सपना दिखाते है, लेकिन उन्‍हें भी राजनीति के घेरे में घेरने का मौका दूसरे लोग नहीं छोड़ रहे हैं। अब देखिए न 9 अगस्‍त को ईद के मौके पर टोपी पहनने को लेकर खासा विवाद गहरा गया। इन दिनों राज्‍य की राजनीति में टोपी पर ही सियासत हो रही है। इस बहाने नरेंद्र मोदी पर भी हमला हो रहा है। मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भोपाल में ईदगाह पर नवाजियों को ईद की मुबारकवाद देने पहुंचे थे, संयोग से वहां फिल्‍म अभिनेता रजा मुराद भी मौजूद थे। इस नजाकत के मौके पर रजा मुराद ने मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में ही गुजरात के मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी का उल्‍लेख किये बिना ही इशारों ही इशारों में ऐसे व्‍यंग्‍य बाण छोड़े कि टोपी पर खासी सियासत हो गई। रजा मुराद ने यह तक कह दिया कि जिम्‍मेदार पद पर बैठे व्‍यक्ति को टोपी पहनने से इंकार नहीं करना चाहिए। टोपी पहनने से धर्म भ्रष्‍ट नहीं होता है। धर्म पर आंच नहीं आती है। कुछ मुख्‍यमंत्रियों को शिवराज सिंह से सीख लेनी चाहिए। उन्‍होंने यह तक कह दिया कि शिवराज सिंह चौहान तो टोपी पहनते हैं, टोपी पहनना बुरी बात नहीं है, पर पहनाना बुरी बात है। इस बयानबाजी ने भाजपा और संघ परिवार में भूचाल ला दिया। यहां तक कि भाजपा के राष्‍ट्रीय प्रवक्‍ता मीनाक्षी लेखी को यह तक कहना पड़ा कि रजा मुराद ने नमुराद जैसी बातें कहीं हैं। इसके साथ ही पूर्व मुख्‍यमंत्री उमा भारती ने भी रजा मुराद पर तीखे आक्षेप लगाये। यहां तक कि उमा भारती ने रजा मुराद को सी-ग्रेड एक्‍टर तक की संज्ञा देते हुए कहा कि मुसलमान दीपावली की बधाई देते समय केसरिया पहनने और हिन्‍दू ईद की बधाई देते समय टोपी पहनने इसकी जरूरत नहीं है। हमें एक करने के लिए तिरंगा ही काफी है। मध्‍यप्रदेश में टोपी  पर खूब सियासत हो रही है। भाजपा और संघ परिवार तो रजा मुराद के बयान से खफा है ही, क्‍योंकि मुख्‍यमंत्री की मौजूदगी में मोदी पर हमले किये गये और मुख्‍यमंत्री शांत रहे। चुनावी वर्ष में ऐसे ही विषयों पर राजनीति होनी है और जमकर राजनेता एक दूसरे पर ही कीचड़ उछालते नजर आयेंगे। 
टोपी बनाम सियासत : 
         टोपी पहनने को लेकर सबसे पहले विवाद मोदी ने शुरू किया था। 18 सितंबर, 2011 को सदभावना उपवास के दौरान एक ईमाम ने मोदी को टोपी पहनानी चाही, तो मोदी ने उनका हाथ पकड़ लिया और टोपी पहनने से इंकार कर दिया। तब से ही टोपी को लेकर खासा विवाद गहराता रहता है। दूसरी ओर मध्‍यप्रदेश के मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी मोदी के प्रतिद्वंदी माने जाते हैं और वे स्‍वयं भी पार्टी में प्रधानमंत्री पद के दावेदार हैं। मोदी और शिवराज की राजनीति में जमीन आसमान का अंतर है। शिवराज मुसलमानों के कार्यक्रमों में टोपी पहनने से कभी मना नहीं करते हैं और उनकी कोशिश है कि मुसलमान भाजपा से जुड़े इसके लिए वे लगातार प्रयास भी कर रहे हैं। ईद के मौके पर मुस्लिम भाईयों के घर-घर जाकर ईद की बधाईयां देते हैं और उनके कार्यक्रमों में खुलकर शिरकत करते हैं। मध्‍यप्रदेश में मुस्लिम वोट का प्रतिशत बहुत सीमित है, बमुश्किल 10 से 15 सीटे मुस्लिम बाहुल्‍य इलाके की हैं। इसके बाद भी चौहान ने मुस्लिम वर्ग को प्रभावित करने का कोई मौका नहीं छोड़ा है। ईद के मौके पर टोपी को लेकर हुई सियासत को लेकर शिवराज सिंह चौहान भी दुखी हुए हैं और वे लगातार कह रहे हैं कि ईद पर्व पर कोई राजनीति नहीं होना चाहिए। दिलचस्‍प यह है कि मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने टोपी पर हुई राजनीति के बाद नरेंद्र मोदी की तुलना सरदार पटेल से की है और उन्‍हें लौह पुरूष तक की संज्ञा दे दी है। 
टोपी की राजनीति पर कांग्रेस हुई आक्रमक : 
            ईद के मौके पर मुख्‍यमंत्री की टोपी को लेकर शुरू हुई राजनीति में भले ही भाजपा चुप हो गई हो और कोई टीका-टिप्‍पणी नहीं कर रही है पर कांग्रेस ने इस पूरे मामले में तीखी बयानबाजी की है। नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने तो कहां है कि मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सत्‍ता के लिए टोपी तिलक की राजनीति कर रहे हैं। भाजपा अब सत्‍ता के लिए हर हथकंडा अपना रही है। मुख्‍यमंत्री ने अपने निवास पर रोजा अफ्तार में केसरिया रंग की टोपी बनवाई और पहनी। फिर ईद के दिन ईदगाह पहुंचे तो पहले टोपी ही नहीं पहनी जब किसी ने कान में कहा तो टोपी पहन ली। बाद में बगल में खड़े रजा मुराद से अपनी तारीफ और मोदी की आलोचना करा दी। उन्‍होंने कहा कि सांप्रदायिक चेहरे पर सेक्‍युलर मुखौटा लगाने का चाहे जितना ढोंग और पाखंड करें जनता अब गुमराह नहीं होगी। इसके साथ ही फिल्‍म अभिनेता रजा मुराद ने साफ कर दिया है कि वह अपनी बात पर अडिग है और उन्‍होंने किसी का नाम नहीं लिया है। उन्‍होंने कहा कि राष्‍ट्रवादी होने के नाते टोपी पहनने, जनेऊ पहनने और चंदन लगाने से किसी मजहब पर आंच नहीं आती। किसी की खुशियों में शामिल होने से धर्म भ्रष्‍ट नहीं होता। जबरन मेरे बयान को नरेंद्र मोदी से जोड़ा जा रहा है। वही इस पूरी राजनीति में पूर्व केंद्रीय मंत्री असलम शेर खान भी कूद आये हैं। उन्‍होंने कहा कि रजा मुराद के बयान को गंभीरता से नहीं लेना चाहिए।
टोपी पर विवाद क्‍यों : 
         टोपी पर विवाद की शुरूआत 18 सितंबर, 2011 से शुरू हुई। गुजरात के मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदभावना उपवास के दौरान एक इमाम से टोपी पहनने से इंकार कर दिया था। इसके बाद देशभर में खूब विवाद हुआ था। अब 2013 में मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के टोपी पहनने को लेकर इस विवाद को नया रंग दिया गया है।
नेताओं ने क्‍या कहा  : 
  •  शिवराज सिंह चौहान मुसलमानों के बच्‍चों को ईद की मुबारक बाद देने आये हैं, कुत्‍तों के बच्‍चों को नहीं। टोपी पहनने से कोई धर्म भ्रष्‍ट नहीं होता। - रजा मुराद, फिल्‍म अभिनेता। 
  •  मैं अब मप्र के लिए चिंतित हूं। वोट जुगाड़ने की स्‍तरहीन राजनीति प्रदेश की तासीर को बिगाड़ेगी। ईद पर रजा मुराद जैसे कलाकार को घटिया स्‍तर की सियासत नहीं करना चाहिए। -उमा भारती, पूर्व मुख्‍यमंत्री। 
  •  ईद एकता और भाईचारे का पर्व है। मंच से मुराद को इस तरह की टीका टिप्‍पणी नहीं करनी चाहिए थी। नरेंद्र मोदी तो सरदार पटेल क तरह हैं। - शिवराज सिंह चौहान, मुख्‍यमंत्री मप्र। 
  • टोपी को इस्‍लाम में पाक माना गया है। इसका सियासी मतलब के लिए इस्‍तेमाल करना और बार-बार मजाक उड़ाना सही नहीं है। किसी भी मजहब के व्‍यक्ति को ऐसा नहीं करना चाहिए। - मौलाना खालिद रशीद फिरंगी, सुन्‍नी धर्मगुरू, लखनऊ। 
  • सत्‍ता की खातिर अब मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान टोपी, तिलक की राजनीति पर उतर आये हैं। इससे जनता प्रभावित नहीं होगी। - अजय सिंह, नेता प्रतिपक्ष। 


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